जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे दिन भू-राजनीति, न्याय और इंटरनेट के भविष्य पर गंभीर मंथन
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के चौथे दिन भू-राजनीति, न्याय, नेतृत्व और इंटरनेट के भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, वीर दास, रिचर्ड फ्लैनेगन, लियो वराडकर और सर टिम बर्नर्स-ली जैसे प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार रखे। दिनभर चले संवादों ने एक बार फिर JLF को विचारों और बहसों का वैश्विक मंच साबित किया।
जयपुर, 18 जनवरी 2026। वेदांता द्वारा प्रस्तुत जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) के चौथे दिन विचारों, बहसों और संवादों की गहराई और भी बढ़ गई। साहित्य, राजनीति, कानून और तकनीक से जुड़े देश-विदेश के प्रमुख विचारकों ने सत्ता, न्याय, नेतृत्व और आज की दुनिया को आकार देने वाली कहानियों पर खुलकर चर्चा की। यह दिन गंभीर सवालों और भविष्य की दिशा तय करने वाले विचारों के नाम रहा।
इससे पहले तीसरे दिन कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास के सत्र ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से छू लिया। उन्होंने शोक (grief) को “पूरी तरह सांस न ले पाने की स्थिति” बताया और समझाया कि कैसे किसी अपने के जाने के बाद वह व्यक्ति हमारे भीतर बसने लगता है। उन्होंने एमी अवॉर्ड जीतने की रात को याद करते हुए अपने सफर की भी चर्चा की—जब शिकागो में डिशवॉशर के तौर पर काम करने वाला व्यक्ति दुनिया के सबसे बड़े मंचों में से एक पर खड़ा था।
चौथे दिन चर्चित लेखक रिचर्ड फ्लैनेगन ने टिम एडम्स के साथ बातचीत में साहित्य की नैतिक जिम्मेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संकट, राजनीतिक उथल-पुथल और इतिहास के टकराव के दौर में लेखक का काम सिर्फ कहानी कहना नहीं, बल्कि सच्चाई के साथ खड़ा होना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि स्मृति हमेशा गवाही नहीं होती, कई बार वह एक नई रचना भी होती है।
“A Continent in Crisis” सत्र में पोलैंड के पूर्व विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोर्स्की और नवतेज सरना ने रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोप की राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक सुरक्षा पर गहन चर्चा की। इस सत्र में यूरोप की एकता और भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
आयरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने “Speaking My Mind” सत्र में सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक नेतृत्व और फैसलों के पीछे की व्यक्तिगत सोच पर खुलकर बात की। यह सत्र भारत में आयरलैंड दूतावास और कल्चर आयरलैंड के सहयोग से आयोजित किया गया।
दिन की सबसे अहम चर्चाओं में से एक रहा “Ideas of Justice”, जिसमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी के साथ संवाद किया। उन्होंने संवैधानिक नैतिकता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय के बदलते अर्थ पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि न्याय कोई सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ा अनुभव है। उन्होंने संविधान को समाज को जोड़ने वाला “कॉमन स्टोन” बताया।
इंटरनेट के भविष्य पर चर्चा करते हुए वर्ल्ड वाइड वेब के जनक सर टिम बर्नर्स-ली ने डिजिटल अधिकारों, विकेंद्रीकरण और वेब को सार्वजनिक हित के मंच के रूप में बचाने की ज़रूरत पर जोर दिया। यह सत्र HPCL–Mittal Energy Limited द्वारा प्रस्तुत किया गया।
दिन का साहित्यिक समापन “The Murder Dialogue” सत्र से हुआ, जिसमें अभिनेता-फिल्मकार अनिरबान भट्टाचार्य और लेखक रुद्रनील सेनगुप्ता ने अपराध कथाओं, सिनेमा और नैतिक जटिलताओं पर चर्चा की। दोनों ने बताया कि उनकी कहानियां केवल अपराध नहीं, बल्कि समाज की गहरी सच्चाइयों को उजागर करती हैं।
चौथे दिन के समापन के साथ ही जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने एक बार फिर यह साबित किया कि यह केवल साहित्य का मंच नहीं, बल्कि विचारों का वैश्विक संगम है। यहां साहित्य, राजनीति, कानून और तकनीक मिलकर वर्तमान को समझने और एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी भविष्य की कल्पना करते हैं।
फेस्टिवल के अंतिम दिन एलिस ऑस्वाल्ड, जीत थायिल, योशितोकी ओइमा, आनंद नीलकंठन और जनीना रामिरेज़ जैसे नामों के साथ अहम संवाद होने वाले हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0