राजस्थान पंचायती राज चुनाव 2026: हाईकोर्ट की 31 जुलाई की डेडलाइन, क्या 20 जून तक आ पाएगी OBC आयोग की रिपोर्ट?
राजस्थान में लंबे समय से टल रहे पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 31 जुलाई 2026 तक चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।
जयपुर, 3 जून 2026: राजस्थान में पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव लंबे समय से टलते आ रहे हैं। आखिरी बार इन चुनावों का आयोजन वर्ष 2020 में हुआ था। अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इन चुनावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
चुनावी विवरण
पंचायती राज चुनाव हर पांच वर्ष में होने चाहिए। 2020 के चुनाव के बाद ये 2025 में होने थे, लेकिन OBC आरक्षण संबंधी सटीक डेटा न होने के कारण बार-बार टलते रहे। भजनलाल शर्मा सरकार ने OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल कई बार बढ़ाया है। हाईकोर्ट ने पहले 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने देरी की मांग की।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
22 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की बेंच ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई 2026 तक पंचायती राज संस्थाओं तथा नगर निकाय चुनाव कराने के सख्त निर्देश दिए।
कोर्ट ने OBC आयोग को 20 जून 2026 तक आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट जमा करने को कहा है। सरकार ने दिसंबर तक समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
महत्वपूर्ण बदलाव
दो बच्चों का नियम हटाया दिया गया है मार्च 2026 में विधानसभा ने यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया, जिससे अब ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ सकेंगे।
मतदाता सूचियां पहले ही अपडेट हो चुकी हैं।
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को फिर से लागू करने की चर्चा जारी है।
वर्तमान स्थिति
3 जून 2026 तक चुनाव अभी नहीं हो पाये हैं। OBC आयोग की रिपोर्ट 20 जून तक आने की उम्मीद है, लेकिन आयोग के पास सीमित संसाधन होने के कारण इसे समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। 31 जुलाई की डेडलाइन भी काफी करीब है।
मुख्य चुनौतियां
- OBC आरक्षण के लिए सटीक डेटा की कमी देखी जा रही है।
- आयोग के पास पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं है।
- वार्ड परिसीमन का काम पहले ही पूर्ण हो चुका है।
कांग्रेस पार्टी भजनलाल सरकार पर देरी का आरोप लगा रही है, जबकि BJP इसे कानूनी और तकनीकी प्रक्रिया बता रही है।
आगे की संभावनाएं
अगर OBC आयोग 20 जून तक रिपोर्ट जमा कर देता है, तो जून के अंत या जुलाई के पहले-दूसरे सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकता है। 2-3 चरणों में मतदान कराया जा सकता है।
अगर रिपोर्ट समय पर नहीं आई, तो सरकार या निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट जा सकता है और समय मांग सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पूरे आरक्षण डेटा के चुनाव कराना मुश्किल है, इसलिए चुनाव अगस्त या सितंबर 2026 तक टल सकते हैं।
पुराने आरक्षण के आधार पर चुनाव कराने पर कानूनी उलझने हो सकती है। आचार संहिता लगने के बाद प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
राजनीतिक महत्व
BJP और कांग्रेस दोनों पार्टियां इन चुनावों में पूरी ताकत झोंक रही हैं। स्थानीय स्तर पर सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव 2027-28 के विधानसभा चुनावों के लिए सेमीफाइनल माने जाते हैं।
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