'पहले दंडवत प्रणाम, फिर झोली फैलाकर मांगी भीख': किसानों के लिए DAP खाद की मांग को लेकर नरेश मीणा का अनोखा प्रदर्शन

राजस्थान में डीएपी (DAP) खाद की भारी किल्लत के बीच किसानों की समस्या को लेकर युवा नेता नरेश मीणा ने एक अनोखा और ध्यान खींचने वाला विरोध प्रदर्शन किया।

Jun 17, 2026 - 23:18
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'पहले दंडवत प्रणाम, फिर झोली फैलाकर मांगी भीख': किसानों के लिए DAP खाद की मांग को लेकर नरेश मीणा का अनोखा प्रदर्शन
Naresh Meena

जयपुर। राजस्थान में रबी की फसल की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन प्रदेश के कई हिस्सों में किसान डीएपी (DAP) खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। किसानों की इस बड़ी समस्या को लेकर राजस्थान की सियासत भी गरमा गई है। इसी कड़ी में हमेशा अपने बेबाक और अलग अंदाज के लिए चर्चा में रहने वाले युवा नेता नरेश मीणा ने एक बेहद अनोखा विरोध प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

प्रशासन के सामने फैला दी झोली

किसानों को खाद न मिलने से नाराज नरेश मीणा स्थानीय प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के सामने उन्होंने सबसे पहले जमीन पर लेटकर 'दंडवत प्रणाम' किया। इसके बाद वे वहीं जमीन पर बैठ गए और अपना गमछा/कपड़ा फैलाकर प्रशासन से कहा कि वे किसानों के हकों के लिए 'भीख' मांग रहे हैं।

उन्होंने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा कि अन्नदाता आज दाने-दाने और खाद की बोरी के लिए मोहताज है, इसलिए वे प्रशासन से भीख मांगकर गुहार लगा रहे हैं कि किसानों को तुरंत डीएपी उपलब्ध कराई जाए।

DAP संकट से जूझ रहा है अन्नदाता

गौरतलब है कि इन दिनों राजस्थान के अधिकांश जिलों में खाद वितरण केंद्रों के बाहर अलसुबह से ही किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। कई जगहों पर खाद वितरण को लेकर पुलिस बल तक तैनात करना पड़ रहा है। किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे सरसों और चने जैसी फसलों की बुवाई में देरी हो रही है। नरेश मीणा का आरोप है कि सरकार और प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं और किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

वायरल हुआ वीडियो, सियासत हुई तेज

नरेश मीणा के इस दंडवत प्रणाम और झोली फैलाकर 'भीख' मांगने वाले प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए उन्होंने न सिर्फ किसानों की परेशानी को प्रमुखता से उठाया है, बल्कि सत्ताधारी दल और प्रशासन पर भी तीखा राजनीतिक तंज कसा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेश मीणा का यह कदम किसानों के बीच उनकी जमीनी पकड़ को और मजबूत करेगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की सियासत में 'किसान और खाद' के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

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