जयपुर | 4 सितंबर 2025 — नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में किसानों की बदहाली का मुद्दा जोर से उठाते हुए आरोप लगाया कि अतिवृष्टि से व्यापक नुकसान के बावजूद सरकार ने पर्याप्त राहत के कदम नहीं उठाए और “मुख्यमंत्री‑मंत्रियों को किसानों की परवाह नहीं” जैसी स्थिति दिख रही है, जिस पर सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामा हुआ । बाहर कांग्रेस विधायकों के साथ जूली ट्रैक्टर चलाकर पहुंचे, गेट पर रोके जाने के बाद भी विरोध जारी रहा और अंदर नारेबाज़ी के बीच कार्यवाही अस्थायी रूप से स्थगित करनी पड़ी।
क्या हुआ
• मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अतिवृष्टि‑प्रभावित जिलों के किसानों के लिए त्वरित सर्वे और किसान मुआवज़ा पैकेज की मांग करते हुए विधानसभा गेट तक विरोध मार्च निकाला, जिसमें जूली ट्रैक्टर से पहुंचे पर सुरक्षा ने आगे बढ़ने से रोका।
• प्रश्नकाल और शून्यकाल में भी नारेबाज़ी के चलते शोरगुल बढ़ा, जिस पर स्पीकर ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील के साथ बैठक को स्थगित कर दिया और फिर भी टकराव का माहौल बना रहा।
जूली के आरोप व मांगें
• जूली ने कहा कि लगातार दो चक्र की बारिश से फसलें चौपट होने के बाद भी समयबद्ध गिरदावरी के आदेश नहीं हुए और मुआवज़ा देने में देरी से किसान परेशान हैं, इसलिए सरकार को तुरंत राहत‑पुनर्सर्वे और भुगतान की टाइमलाइन घोषित करनी चाहिए।
• विरोध के दौरान उन्होंने कहा कि “जनता की आवाज़” सदन के भीतर‑बाहर उठती रहेगी, और प्रभावित किसानों के लिए पारदर्शी आकलन, जिला‑वार सहायता और ब्याज/किस्त राहत की ठोस कार्ययोजना लाई जाए।
सदन और सरकार का रुख
• सदन में कृषि‑राहत, स्मार्ट मीटर बोझ और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सत्ता‑विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई, जिससे माहौल बार‑बार गरमाया और कार्यवाही बाधित हुई ।
• सरकार की ओर से प्रक्रियात्मक जवाबों के बावजूद विपक्ष ने समयबद्ध गिरदावरी‑मुआवज़ा और मंत्रीस्तरीय दौरे/निरीक्षण की सार्वजनिक रिपोर्ट पेश करने की मांग पर ज़ोर बनाए रखा।
राजनीतिक संदर्भ
• विरोध प्रदर्शन के लिए जूली का ट्रैक्टर चलाकर आना प्रतीकात्मक संदेश माना गया, जिसका मकसद सड़कों से लेकर सदन तक किसान‑मुद्दों पर दबाव बढ़ाना था ।
• विधानसभा परिसर के बाहर विपक्षी प्रदर्शन और भीतर स्थगन‑घोषणाओं ने संकेत दिया कि सत्र के शेष दिनों में किसान‑राहत और आपदा‑प्रबंधन ही बहस का प्रमुख केंद्र रहेंगे ।