Rajasthan News: राजस्थान कांग्रेस में 'गहलोत बनाम पायलट' की जंग फिर शुरू: क्या होंगे इस अंदरूनी कलह के बड़े साइड इफेक्ट्स?
राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की सियासी अदावत एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। दौसा की बैठक में गहलोत को 'बूढ़ा' बताने और पायलट को नया 'बॉस' बनाने की मांग के बाद इस घमासान के गंभीर साइड इफेक्ट्स होने की आशंका है।
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में 'सब कुछ ठीक है' का भ्रम एक बार फिर टूट गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की पुरानी अदावत (Feud) एक बार फिर सतह पर आ गई है। हाल ही में दौसा की एक बैठक में पायलट समर्थकों द्वारा अशोक गहलोत की उम्र पर तंज कसने और पायलट को राजस्थान कांग्रेस का नया 'बॉस' बनाने की मांग के बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अंदरूनी कलह के कांग्रेस पार्टी पर कई गंभीर साइड इफेक्ट्स (Side Effects) देखने को मिल सकते हैं:
संभावित साइड इफेक्ट्स: कांग्रेस को कहाँ होगा नुकसान?
1. आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर संकट
राजस्थान में इस साल पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। ऐसे समय में शीर्ष नेतृत्व के बीच की यह खींचतान जिला और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं को दो गुटों में बांट देगी। टिकट वितरण (Ticket Distribution) के दौरान दोनों गुट अपने-अपने चहेतों को टिकट दिलाने के लिए अड़ेंगे, जिससे पार्टी के भीतर बगावत और भीतरघात का खतरा काफी बढ़ जाएगा।
2. कार्यकर्ताओं की निराशा और मनोबल टूटना
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता अभी संभल ही रहे थे कि इस नई बयानबाजी ने उन्हें फिर से असमंजस में डाल दिया है। जब जमीनी कार्यकर्ताओं को लगेगा कि नेता आपस में ही वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो उनका मनोबल टूटेगा और वे जनता के बीच जाने से कतराएंगे।
3. भाजपा को मिलेगा सीधा वॉकओवर
कांग्रेस की इस आपसी फूट का सबसे बड़ा और सीधा फायदा प्रदेश की सत्ताधारी भाजपा (BJP) को मिलेगा। भाजपा इस मुद्दे को भुनाकर जनता के बीच यह संदेश देगी कि कांग्रेस एक 'बिखरी हुई पार्टी' है जो प्रदेश को मजबूत विपक्ष नहीं दे सकती। इसके अलावा, सरकार विरोधी मुद्दों (जैसे कानून-व्यवस्था, पेपर लीक) पर जो आक्रामक अभियान कांग्रेस को चलाना चाहिए, वह इस आपसी कलह के कारण कमजोर पड़ जाएगा।
पुरानी कड़वाहट, नई जंग: साल 2020 की पायलट की बगावत और 25 सितंबर 2022 को गहलोत गुट के विधायकों के सामूहिक इस्तीफे के घाव अभी भरे नहीं थे कि 'क्राइसिस 2.0' के आहट ने आलाकमान की चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।
भविष्य की राह: क्या करेगी कांग्रेस?
पार्टी के भीतर उठ रही इन आवाजों से साफ है कि राजस्थान कांग्रेस में 'नेतृत्व परिवर्तन' और युवाओं को आगे लाने की मांग अब और मुखर होने लगी है। यदि दिल्ली आलाकमान ने समय रहते इस गुटबाजी पर लगाम नहीं लगाई, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस को इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल दोनों ही गुटों के आला नेताओं की ओर से इस पर चुप्पी साधी गई है, लेकिन यह शांति किसी बड़े सियासी तूफान के आने का संकेत दे रही है।
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