Rajasthan Diwas 2026: एक्टर गौरव देवासी का छलका दर्द, बोले- 'संवैधानिक दर्जे के बिना दम तोड़ रही है हमारी मायड़ भाषा'

राजस्थान दिवस के अवसर पर फिल्म अभिनेता गौरव देवासी (Gaurav Dewasi) ने 'मायड़ भाषा' (राजस्थानी) को संवैधानिक दर्जा न मिलने पर गहरी चिंता जताई है।

Mar 30, 2026 - 17:24
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Rajasthan Diwas 2026: एक्टर गौरव देवासी का छलका दर्द, बोले- 'संवैधानिक दर्जे के बिना दम तोड़ रही है हमारी मायड़ भाषा'
Gaurav Dewasi

जयपुर। 30 मार्च को पूरा प्रदेश 'राजस्थान दिवस' (Rajasthan Diwas) के जश्न में डूबा है। इस खास मौके पर जहां हर तरफ से बधाइयों का तांता लगा है, वहीं राजस्थानी और हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता गौरव देवासी (Gaurav Dewasi) ने एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश जारी किया है। गौरव ने प्रदेशवासियों को राजस्थान दिवस की शुभकामनाएं तो दीं, लेकिन साथ ही अपनी मातृभाषा यानी 'मायड़ भाषा' की हो रही घोर उपेक्षा पर गहरी चिंता भी जाहिर की है।

गौरव देवासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्थान की असली पहचान यहां की शूरवीरता और समृद्ध संस्कृति से है, और किसी भी संस्कृति को जिंदा रखने वाली उसकी भाषा होती है। अपना दर्द बयां करते हुए अभिनेता ने कहा, "यह बड़े सौभाग्य की बात है कि हम उस धरती के निवासी हैं जहां 'पधारो म्हारे देस' की संस्कृति फलती-फूलती है। लेकिन यह भी उतना ही बड़ा दुर्भाग्य है कि आज तक हम अपनी मातृभाषा, राजस्थानी, को संविधान की 8वीं अनुसूची (8th Schedule of the Constitution) में शामिल नहीं करवा पाए हैं। संवैधानिक दर्जे के अभाव में राजस्थानी भाषा न केवल पिछड़ रही है, बल्कि धीरे-धीरे दम तोड़ रही है।"

सिनेमा और रोजगार पर गहरा संकट

राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री की चुनौतियों का जिक्र करते हुए देवासी ने जोर देकर कहा कि जब तक राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में आधिकारिक स्थान नहीं मिलता, तब तक राजस्थानी सिनेमा और साहित्य को वह वैश्विक और राष्ट्रीय मंच नहीं मिल पाएगा, जिसका वह असल में हकदार है। उन्होंने सरकारों से कड़े शब्दों में मांग की है कि राजस्थानी भाषा की मान्यता को केवल चुनावों के समय का 'राजनीतिक मुद्दा' न बनाया जाए, बल्कि इसे जल्द से जल्द कानूनी अमलीजामा पहनाया जाए ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकें।

युवाओं से की खास अपील

अपने संदेश के आखिर में गौरव देवासी ने प्रदेश के युवाओं से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को अपनी मातृभाषा बोलने में किसी भी तरह की झिझक या शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। उन्होंने एक बेहद दमदार नारा देते हुए कहा- "भाषा है तो सम्मान है, और सम्मान है तो राजस्थान है।" 

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