Rajasthan News: राजस्थान में खत्म होगा जल संकट! यमुना जल प्रोजेक्ट के MoA पर हुआ ऐतिहासिक साइन; बिछेगी 295.5 किमी लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन

राजस्थान के शेखावटी और आस-पास के इलाकों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से लंबित पड़े यमुना जल प्रोजेक्ट के मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर आखिरकार हस्ताक्षर हो गए हैं।

Jun 29, 2026 - 15:08
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Rajasthan News: राजस्थान में खत्म होगा जल संकट! यमुना जल प्रोजेक्ट के MoA पर हुआ ऐतिहासिक साइन; बिछेगी 295.5 किमी लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन
Rajasthan Yamuna water project

चूरू। मरुधरा के एक बड़े हिस्से को पानी की किल्लत से निजात दिलाने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। दशकों से फाइलों में दबे और राज्यों के आपसी विवादों में उलझे यमुना जल प्रोजेक्ट (Yamuna Water Project) को लेकर आखिरकार अंतिम सहमति बन गई है और मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं।

इस समझौते के धरातल पर उतरने के साथ ही राजस्थान के शेखावटी अंचल सहित कई जिलों में पीने के पानी और सिंचाई के संकट का स्थायी समाधान हो जाएगा।

परियोजना की मुख्य बातें: 295.5 किमी लंबी पाइपलाइन

इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है ताकि पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल हो सके और वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण पानी व्यर्थ न बहे:

अंडरग्राउंड पाइपलाइन: इस परियोजना के तहत खुले चैनल या नहर के बजाय 295.5 किलोमीटर लंबी विशाल अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

चोरी और बर्बादी पर रोक: पाइपलाइन पूरी तरह से भूमिगत होने के कारण पानी की चोरी, रिसाव (Seepage) और प्रदूषण की संभावना शून्य हो जाएगी।

हरियाणा से मिलेगा पानी: ताजेवाला हेडवर्क (हरियाणा) से राजस्थान के निर्धारित कोटे का यमुना जल इस पाइपलाइन के जरिए सीधे मरुधरा के प्यासे इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किन जिलों की बदलेगी तकदीर?

यमुना जल परियोजना का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के उन जिलों को मिलेगा जो लंबे समय से गंभीर भूजल संकट (Dark Zone) और खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। मुख्य रूप से चूरू, झुंझुनू और सीकर (शेखावटी क्षेत्र) के करोड़ों लोगों को इससे सीधा लाभ पहुंचेगा:

शुद्ध पेयजल की उपलब्धता: फ्लोराइड और खारे पानी की समस्या से परेशान गांवों और कस्बों को हिमालय और यमुना का मीठा व शुद्ध पानी पीने को मिलेगा।

खेती-किसानी को नई संजीवनी: इस पानी का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई के लिए आरक्षित किया जाएगा, जिससे इस अर्ध-शुष्क क्षेत्र के किसान रबी और खरीफ की फसलों का बेहतर उत्पादन कर सकेंगे।

दशकों पुराना इंतजार हुआ खत्म

गौरतलब है कि साल 1994 में पांच राज्यों के बीच यमुना जल के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था, जिसमें राजस्थान का भी हिस्सा तय किया गया था। लेकिन तकनीकी दिक्कतों और हरियाणा के साथ लंबे समय तक चले गतिरोध के कारण राजस्थान अपने हिस्से का पानी नहीं उठा पा रहा था।

भजनलाल सरकार की बड़ी कामयाबी: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद दोनों राज्यों के बीच इस गतिरोध को तोड़ा गया। MoA पर साइन होने के बाद अब डीपीआर (DPR) के अनुसार टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

इस ऐतिहासिक समझौते के बाद शेखावटी और पूरे राजस्थान के राजनीतिक व सामाजिक हलकों में भारी उत्साह है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला 'गेम चेंजर' साबित होगा।

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