RPSC में बड़ा बदलाव: भर्ती विवादों के बीच डॉ. मंजु शर्मा का इस्तीफा, आयोग की गरिमा और पारदर्शिता का हवाला

यह इस्तीफा RPSC में भरोसा बहाली, संरचनात्मक सुधार और जवाबदेही तय करने के दबाव के बीच आया है, जिस पर अब सरकार और आयोग को तेज कदम उठाने होंगे.

Sep 1, 2025 - 19:02
Sep 1, 2025 - 19:03
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RPSC में बड़ा बदलाव: भर्ती विवादों के बीच डॉ. मंजु शर्मा का इस्तीफा, आयोग की गरिमा और पारदर्शिता का हवाला
Manju Sharma & Kumar Vishwas
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य और कवि कुमार विश्वास की पत्नी डॉ. मंजु शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस्तीफे की वजह भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े हालिया विवादों से आयोग की गरिमा और उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर पड़े असर को बताया.
क्या लिखा इस्तीफे में
डॉ. शर्मा ने पत्र में कहा कि उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी से काम किया है, उनके खिलाफ किसी संस्था में कोई जांच लंबित नहीं है और उन्हें किसी मामले में अभियुक्त भी नहीं बनाया गया है, इसके बावजूद आयोग की गरिमा, निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि मानते हुए वे स्वेच्छा से पद छोड़ रही हैं.

इस्तीफा ऐसे समय आया है जब 2021 की एसआई भर्ती रद्द होने पर हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणियों के बाद RPSC पर व्यापक स्तर पर सवाल उठे हैं और कुछ सदस्यों की भूमिका को लेकर भी अदालत ने गंभीर अवलोकन दर्ज किए हैं.
पृष्ठभूमि और विवाद
डॉ. मंजु शर्मा का नाम पहले भी 2021 की एसआई भर्ती और अन्य परीक्षाओं से जुड़े आरोपों की खबरों में आया था, हालांकि एसीबी ने 2024 में ईओ भर्ती रिश्वत प्रकरण में उन्हें क्लीन चिट दी थी, जिससे वे उस मामले में आरोपमुक्त रहीं.
हाई कोर्ट ने हाल में 2021 एसआई भर्ती रद्द करते हुए आरपीएससी में प्रणालीगत भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणियां कीं और कुछ सदस्यों की कथित जानकारी/संलिप्तता पर चिंता जताई, जिससे आयोग में जवाबदेही और सुधार की मांग तेज हुई है.
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
यह इस्तीफा RPSC में भरोसा बहाली, संरचनात्मक सुधार और जवाबदेही तय करने के दबाव के बीच आया है, जिस पर अब सरकार और आयोग को तेज कदम उठाने होंगे.
प्रकरण ने भर्ती पारदर्शिता, पेपर लीक और इंटरव्यू प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सार्वजनिक भरोसे को प्रभावित किया है, जिससे व्यापक सुधार की मांग को बल मिला है.
आगे क्या
सरकार द्वारा RPSC की प्रक्रियाओं की समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने, और UPSC की तर्ज़ पर ढांचे में सुधार जैसे कदमों पर निर्णय अपेक्षित हैं, ताकि भविष्य की भर्तियाँ पारदर्शी और विश्वसनीय हों.
उम्मीदवारों और जनता की नजर अब आयोग के पुनर्गठन, लंबित भर्तियों के रोडमैप और जिम्मेदारियों के निर्धारण पर रहेगी, जिससे भर्ती तंत्र में भरोसा पुनर्स्थापित हो सके.

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