चूरू सांसद राहुल कस्वां की पहल: पीएम आवास लाभार्थियों के लिए रिचार्ज पिट की जगह निजी कुंड निर्माण की मांग
सदियों से वर्षा जल संचयन के लिए कुंड निर्माण स्थानीय परंपरा रही है और यही पेयजल का भरोसेमंद स्रोत है। निजी कुंड बनने से वर्षा जल सुरक्षित रूप से संग्रहित होगा, आमजन को पेयजल व घरेलू उपयोग के लिए मीठा पानी मिलेगा और योजना क्षेत्र की भौगोलिक व सामाजिक जरूरतों के अधिक अनुरूप हो सकेगी।
दिल्ली। चूरू लोकसभा क्षेत्र के सांसद राहुल कस्वां ने जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के घरों पर जल संचयन के लिए रिचार्ज पिट के स्थान पर निजी कुंड बनवाने की मांग रखी। कस्वां ने जल शक्ति मंत्रालय के मिशन डायरेक्टर एवं अतिरिक्त सचिव अर्चना शर्मा और निदेशक एन. अशोक बाबू से इस संबंध में विस्तार से चर्चा की।
कस्वां ने बताया कि ‘जल संचयन–जन भागीदारी’ योजना के तहत देशभर में रिचार्ज पिट और अन्य संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल संचयन का काम किया जा रहा है, और अब यह काम चूरू संसदीय क्षेत्र में भी पीएम आवास योजना के चयनित लाभार्थियों के घरों पर शुरू हो रहा है। उनके मुताबिक चूरू और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में भूजल काफी खारा है, जबकि यहां सदियों से बारिश के पानी को बचाने के लिए कुंड/कुण्डी जैसी पारंपरिक प्रणालियां अपनाई जाती रही हैं, जो पेयजल का मुख्य स्रोत रही हैं।
सांसद ने तर्क दिया कि यदि इस योजना के अंतर्गत रिचार्ज पिट की जगह पीएम आवास लाभार्थियों के आवास पर निजी कुंड निर्माण को स्वीकृति दी जाए, तो वर्षा जल सुरक्षित ढंग से संग्रहित हो सकेगा और आमजन को पेयजल तथा अन्य घरेलू कार्यों के लिए मीठा पानी उपलब्ध होगा। उनका कहना है कि ऐसा फैसला जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय परिस्थिति के अनुरूप व्यावहारिक समाधान साबित होगा।
कस्वां ने जल शक्ति मंत्रालय से मांग की कि ‘जल संचय–जन भागीदारी’ के दिशा–निर्देशों में चूरू जैसे खारे भूजल वाले इलाकों के लिए लचीलापन दिया जाए और चूरू संसदीय क्षेत्र में पीएम आवास योजना के लाभार्थियों के लिए रिचार्ज पिट के स्थान पर निजी कुंड निर्माण की स्वीकृति जारी की जाए।
कुंड क्या होते हैं? रेगिस्तानी इलाकों की पारंपरिक वर्षा जल भंडारण प्रणाली
कुंड (या कुण्डी) दरअसल पक्की, टंकीनुमा जल संरचना होती है, जिसे ज़मीन की सतह से थोड़ा नीचे या समतल स्तर पर बनाया जाता है और चारों तरफ से पत्थर, सीमेंट, चूना आदि से इस तरह सील किया जाता है कि बारिश का मीठा पानी साल भर तक सुरक्षित रखा जा सके। छत, आंगन या आसपास के पक्के कैचमेंट एरिया से पाइप या नालियों द्वारा वर्षा जल इस कुंड में लाया जाता है, ऊपर जाली या ढक्कन रहता है ताकि धूल–कचरा और जानवर अंदर न जा सकें और पानी साफ बना रहे।
राजस्थान, खासकर चूरू, बीकानेर, जैसलमेर जैसे शुष्क और खारे भूजल वाले क्षेत्रों में सदियों से कुंड ही पेयजल का भरोसेमंद साधन रहे हैं, क्योंकि यहां ज़मीन के नीचे का पानी अक्सर खारा या असुरक्षित होता है। ऐसे में लोग बरसात के 2–3 महीनों में इन कुंडों को भर लेते हैं और फिर पूरे साल पीने, खाना बनाने और जरूरी घरेलू उपयोग के लिए इसी संचयित मीठे पानी पर निर्भर रहते हैं। यही कारण है कि सांसद कस्वां चाहते हैं कि रिचार्ज पिट के बजाय पीएम आवास लाभार्थियों के घरों पर निजी कुंड बनें, ताकि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक योजना दोनों को जोड़ा जा सके।
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