"जनता से दूरी बर्दाश्त नहीं"- मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने मंत्रियों को सख़्त चेतावनी दी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन मंत्रियों पर नाराज़गी जताई जो नियमित जनसुनवाई नहीं कर रहे या जनता की शिकायतों को समय पर सुनने में असफल हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को सेवा के लिए चुना है, इसलिए लोगों से दूरी बनाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की अवहेलना है।
जयपुर| राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने मंत्रियों और विधायकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में साफ शब्दों में कहा है कि जनता और कार्यकर्ताओं से मिलना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस कर्तव्य में लापरवाही को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उन मंत्रियों पर नाराज़गी जताई जो नियमित जनसुनवाई नहीं कर रहे या जनता की शिकायतों को समय पर सुनने में असफल हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को सेवा के लिए चुना है, इसलिए लोगों से दूरी बनाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की अवहेलना है।
शर्मा ने बैठक में कहा कि वे स्वयं लगातार जनता से मिलते हैं, दौरे करते हैं और समय से काम करवाने का प्रयास करते हैं — ऐसे में किसी मंत्री द्वारा यह कहना कि "समय नहीं है" बिल्कुल उचित नहीं माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार को कई जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ विभागों में काम अटका हुआ है, और अधिकारी तथा मंत्री जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे। इन शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त भाषा में स्पष्ट कर दिया कि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी है।
सरकार के इस निर्णय को आने वाले स्थानीय चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चेतावनी सरकार की कार्यशैली को तेज करने और ज़मीनी स्तर पर प्रदर्शन बेहतर करने की दिशा में उठाया गया कदम है। मुख्यमंत्री की ओर से यह संदेश भी दिया गया कि जनप्रतिनिधियों को केवल कार्यालय में बैठकर आदेश देने के बजाय क्षेत्र में जाकर लोगों से संवाद करना होगा, समस्याओं की वास्तविक स्थिति समझनी होगी और समाधान सुनिश्चित करना होगा। अगर संबंधित मंत्री या विभाग इस निर्देश का पालन नहीं करते, तो उन पर कार्रवाई होने की भी संभावना जताई गई है।
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