Raja Ram Mohan Roy: राजा राममोहन राय के 250वें जन्मदिन पर जानिए सती प्रथा के विरोधी बनने के पीछे की कहानी

राजा राममोहन राय: कट्टर ब्राह्मण परिवार में जन्मे राम मोहन राय बचपन से ही सामाजिक और धार्मिक रुढ़ियों के खिलाफ़ होते गए। बाद में उन्हीं के प्रयासों से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने भारत में सती प्रथा को बंद करने का ऐलान किया था।

May 22, 2022 - 00:08
May 22, 2022 - 04:35
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Raja Ram Mohan Roy: राजा राममोहन राय के 250वें जन्मदिन पर जानिए सती प्रथा के विरोधी बनने के पीछे की कहानी
Raja Ram Mohan Roy: Photo: Social Media

राजा राममोहन राय (Raja Ram Mohan Roy) 250वां जन्मदिन विशेष : 22 मई 2022 को है राजा राममोहन राय की 250वीं जयंती। आइए जानते हैं उनके जीवन की एक घटना के बारे में जब राजाराम मोहन राय की भाभी को जिंदा जला दिया गया था। जानें कैसे मनाया जाएगा उत्सव।

सती प्रथा को बंद करवाने में दिया था अहम योगदान

आधुनिक भारत के निर्माता, भारतीय पुनर्जागरण के जनक और ब्रह्मसमाज के संस्थापक राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 ईस्वी को बंगाल के मुर्शीदाबाद के राधा नगर में हुआ था। कट्टर ब्राह्मण परिवार में जन्मे राम मोहन राय बचपन से ही सामाजिक और धार्मिक रुढ़ियों के खिलाफ़ होते गए। बाद में उन्हीं के प्रयासों से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने भारत में सती प्रथा को बंद करने का ऐलान किया था।

घटना जिसने बदल दी राम मोहन राय की जिंदगी

राम मोहन जब विदेश पर थे तब उनके भाई की मृत्यु हो गई थी और प्रचलित सती प्रथा के अनुसार उनकी भाभी को जिंदा जला दिया गया था। इस घटना से राममोहन इतने आहत हुए कि उन्होंने प्रण ले लिया कि किसी और औरत के साथ ऐसा नहीं होने दूंगा।

राम मोहन राय का शुरुआती जीवन

15 वर्ष की आयु तक उन्होंने बंगाली, संस्कृत, अरबी और फारसी का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। किशोरावस्था में वे खूब घूमें। ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए 1809-1814 तक नौकरी भी की और फिर नौकरी छोड़कर वे स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु लड़ाई में कूद पड़े। उन्होंने दोहरी लड़ाई लड़ी, एक ईस्ट इंडिया कंपनी से और दूसरी देश के नागरिको से। वे समाज में व्याप्त वर्षों की कुरीतियों, जैसे सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दा प्रथा तथा जातिवाद को खत्म कर देना चाहते थे।

ब्रह्म समाज की स्थापना

राजाराम मोहन राय को ब्रह्म समाज के संस्थापक के रूप में भी पहचाना जाता है। उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना 20 अगस्त 1828 में हिंदू धर्म की कुरीतियों ,सामाजिक रुढ़ियों को समाप्त करने के लिए की थी। हालांकि बाद में केशवचंद्र सेन और देवेंद्र नाथ ठाकुर भी ब्राह्म समाज से जुड़े। राजाराम मोहन राय काफी हद तक समाज में सुधार लाने में सफल रहे थे।

ऐसे मनाया जाएगा 250वां जन्मदिन

राजा राममोहन राय की 250 वीं जयंती धूमधाम से मनाने की तैयारी है। पश्चिम बंगाल राज्य में 30 मई को साइंस सिटी मिनी ऑडिटोरियम में द म्यूज़िकल यूनिवर्स ऑफ राजा राममोहन रॉय नाम से कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में ब्रह्म संगीत के साथ ही राम मोहन राय के समय में प्रचलित शास्त्रीय संगीत भी गाया जाएगा।

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