राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा: लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता की नई लड़ाई
राहुल गांधी ने 17 अगस्त 2024 से बिहार में वोटर अधिकार यात्रा शुरू की, जिसका मक़सद चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों को जनता तक ले जाना है। उन्होंने डुप्लीकेट वोटर, फर्जी पते और अवैध वोटिंग जैसे मामलों को उजागर करते हुए आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। यह यात्रा मतदाताओं को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करने और निष्पक्ष चुनाव की मांग को मज़बूत करने के लिए है।
साल 2022, सितम्बर में राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा शुरू करते हैं। इस यात्रा का मक़सद नफ़रत की राजनीति का विरोध और कांग्रेस की खोई हुई ज़मीन वापसी लेना दिखाई देता है। इसके साथ ही कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता के बीच बढ़ती हुई दूरी को पाटना भी इसका एक लक्ष्य नज़र आता है। इसलिए हम देखते हैं कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक कि यह यात्रा ‘जोड़ो जोड़ो, भारत जोड़ो’ के नारे के साथ शुरू होती है और ‘नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान’ के नारे के साथ समाप्त होती है। भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा भाग ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के रूप में दिखाई देता है। भारत जोड़ो यात्रा 7 सितंबर, 2022 से 30 जनवरी, 2023 तक चली और इस दौरान 12 राज्यों से गुज़रते हुए 3500KM से अधिक दूरी तय की गई। इसी प्रकार ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का आरम्भ 14 जनवरी, 2024 को मणिपुर के थोउबल से हुआ और समापन 16 मार्च, 2024 को मुम्बई में हुआ।
- जैसा कि पहले बताया कि दोनों यात्राओं का मक़सद सांप्रदायिकता और नफ़रत भरी राजनीति के विरोध और विकल्प के रूप में मोहब्बत, प्रेम और भाईचारे की राजनीति करना और कहीं न कहीं कांग्रेस का अपनी पुरानी पैठ को वापस पाना भी था। अतः यात्राओं का मक़सद सामाजिक के साथ राजनीतिक भी था।
भारत की राजनीति में यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। न केवल आज़ादी से पहले बल्कि आज़ादी के बाद भी राजनीतिक मकसद से अनेक नेताओं ने यात्राएँ की है। चंद्रशेखर, वाई एस राजशेखर रेड्डी, चंद्रबाबू नायडू , वाई एस जगनमोहन रेड्डी, दिग्विजय सिंह या राहुल गांधी जैसे नेताओं ने राजनीतिक मक़सद से यात्रा की ओर से इसमें कुछ हद तक सफल भी हुए। 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को भी इस यात्रा का फ़ायदा मिला। इसी कड़ी में एक यात्रा का नाम और जुड़ गया "वोटर अधिकार यात्रा"।
17 अगस्त से राहुल गांधी बिहार में वोटर अधिकार यात्रा पर हैं। यह यात्रा अपने आप में बहुत ख़ास और अन्य यात्राओं से हटकर है। इस यात्रा को ख़ास बनाता है इसका शीर्षक और मूल उद्देश्य ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और ‘एक वोटर एक वोट’ की टैगलाइन।
अभी तक राहुल गांधी लगातार इस बात को लेकर सरकार पर हमलावर रहते थे कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है और अप्रत्यक्ष रूप से उनका इस्तेमाल अपने राजनीतिक फ़ायदों के लिए कर रही है। अभी चुनाव आयोग जैसी संस्था भी इस शक के घेरे में खड़ी है। इसका सबसे ख़तरनाक और बड़ा उदाहरण देखने को मिला जब मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया बदल दी गई और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पत्र लिखकर इस प्रक्रिया का विरोध भी किया था। इस प्रक्रिया के अलावा भी भारत में चुनावी प्रक्रिया पर पिछले लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कभी सवाल बैलेट वोट में धाँधली का होता है तो कभी EVM पर सवाल उठ जाते हैं। चंडीगढ़ में बैलेट में पेन से गड़बड़ करते अधिकारी अनिल मसीह का वीडियो सबके सामने आया और मामला ज़्यादा तूल पकड़ा तो उस अधिकारी को हटाया गया।
इसके अलावा UP में एक जाति और धर्म विशेष के वोट कटने की बात हो या वोटिंग और काउंटिंग प्रक्रिया में धाँधली हो, ऐसे कई मामले सामने आये जब चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग संदेह के घेरे में दिखाई दिये। लोकसभा चुनाव में सूरत में निर्विरोध प्रत्याशी का जीत जाना हो या इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी का अचानक नामांकन वापिस लेना हो या खजुराहो में सपा के प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना हो या फिर जयपुर ग्रामीण लोक सभा में अंतिम परिणाम के समय बैलेट में गड़बड़ी की शिकायत हो या मतदान के बाद में वोटिंग प्रतिशत बढ़ जाना हो, कहीं पर बैलेट वोट मत पेटियों का समय से पहले खुल जाना हो या फिर स्ट्रोंग रूम में लाइट चली जाना; ये तमाम ऐसी घटनाएँ है जहाँ चुनाव आयोग की साख कमज़ोर हुई है और एक संवैधानिक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था के रूप में चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हुए।
महाराष्ट्र चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी ने मीडिया से मुख़ातिब होते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव में इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने का एक बड़ा कारण था नया वोटर।महाराष्ट्र में पिछले पाँच वर्षों में इतने वोटर नहीं जुड़े थे जितने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच में जोड़े गये। बक़ौल राहुल गांधी 2019 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच महाराष्ट्र में 32 लाख मतदाता जुड़े। जबकि 2024 लोक सभा चुनाव और 2024 विधानसभा चुनावों के बीच केवल पाँच महीने में 39 लाख नए मतदाता जुड़े। इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि महाराष्ट्र में वयस्क जनसंख्या 9.54 करोड़ है तो विधानसभा चुनावों में मतदाता की संख्या 9.74 करोड़ थी। दोनों आरोप बड़े गंभीर हैं। ये आरोप शक की सुई चुनाव आयोग की तरफ करते हैं और सवाल तार्किक भी हैं कि महज़ पाँच छः महीने में ऐसा क्या हुआ कि इतने सारे वोटर जुड़ गये।
महाराष्ट्र चुनाव के बाद जो चुनाव आयोग सवालों के घेरे में खड़ा था उसी आयोग पर पुनः एक बार सवालिया निशान खड़े हुए जब हाल ही में लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ़्रेंस की और बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट कि एक विधानसभा सीट के आंकड़े पेश किये।
राहुल गांधी के अनुसार इस सीट पर 1 लाख से ज़्यादा वोटों की चोरी हुई या मतदान में हेरफेर हुई। नेता प्रतिपक्ष ने पाँच तरीक़े से वोट चोरी का डाटा मीडिया के सामने रखा।
. डुप्लीकेट वोटर (एक व्यक्ति, कई बार) (11965)
. फ़र्ज़ी और अमान्य पत्ते (40009)
. एक ही पते पर सैकड़ों वोटर (10452)
. अवैध फ़ोटो ID (4132)
. फ़ोरम 6 का दुरुपयोग है (33692)
कुल (100250)
इन पाँच तरीक़ों से कुल 1,00,250 फ़र्ज़ी वोटों की बात राहुल गांधी ने मीडिया से की और इसके लिए पर्याप्त सबूत भी मीडिया के सामने रखे।
इस डाटा में बताये गए तरीक़ों की पुष्टि भी हुई जब कई मीडियाकर्मी राहुल गांधी द्वारा बताए गए पते पर पहुँचे और इन आरोपों को सही पाया। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश में हुई धाँधली और शिकायतों का रिकॉर्ड मीडिया के सामने रख दिया।
इससे पहले बिहार में SIR में काटे जा रहे नामों को लेकर विरोध चल ही रहा था। SIR में डॉक्यूमेंट की लिस्ट से आधार को हटाये जाने पर भी सवाल खड़े हो रहा थे।
ऐसे में राहुल गांधी द्वारा निकाली जा रही “वोटर अधिकार यात्रा” अपने आप में महत्वपूर्ण हो जाती है। अभी तक मोदी सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग की बात चलती थी लेकिन इस समय चुनाव आयोग को सीधा कठपुतली जैसा बना दिया जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त में हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स की लेकिन ये प्रेस कॉन्फ़्रेन्स बड़े सवालों को अनसुना ही छोड़ देती है।
वोटर अधिकार यात्रा’ के ज़रिए राहुल गांधी एक संस्था के रूप में चुनाव आयोग की नाकामी को जनता के बीच ले जा रहे हैं। वो बता रहे हैं उन तमाम तौर तरीक़ों और कूटनीतियों को जिनके द्वारा वोटर को उनके अधिकार से वंचित रखा जाता है। ऐसा शायद पहली बार हो रहा है जब चुनाव आयोग जैसी वैधानिक संस्था को लेकर राजनीति इतनी गरमाई हुई है और हर गली-चौराहों पर चुनाव आयोग की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं।
राहुल गांधी कि इस यात्रा का मक़सद सिर्फ़ चुनाव जीतना नहीं है बल्कि उस पूरी चुनावी प्रक्रिया का भंडाफोड़ करना है जो पिछले कई वर्षों से BJP और चुनाव आयोग की मिलीभगत से चल रही है।
इस यात्रा का मूल मक़सद है मतदाता को उसके मतदान के अधिकारी के प्रति जागरूक करना। इसलिए ही इस यात्रा को नाम दिया गया है “वोटर अधिकार यात्रा”।
अभी तक अनेक राजनेताओं ने यात्राएं कीं और उससे सत्ता हासिल हुई लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद वे सब भी उन्हीं कामों में लग गये जिनके ख़िलाफ़ खड़े हुए थे। क्योंकि वो यात्राएं सत्ता के ख़िलाफ़ थी किसी संस्था के ख़िलाफ़ नहीं।
लेकिन “वोटर अधिकार यात्रा” एक संवैधानिक संस्था ‘चुनाव आयोग’ में चल रही गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ है। इस यात्रा का मक़सद कुछ लोगों को राजनीति से प्रेरित लग सकता है लेकिन असल में इस यात्रा का फ़ायदा चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को ही होगा। अगर चुनाव आयोग उन सारी समस्याओं को दूर करता है, जो नेता विपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं ने ज़ाहिर की है, तो अन्ततः चुनाव की पारदर्शिता ही बढ़ेगी जो लोकतंत्र के लिए सुखद ही है।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
0
Love
1
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0