खान विभाग के मुख्य सचिव टी रविकांत ने कहा—खनिज के ढेरों में से बहुमूल्य और क्रिटिकल खनिजों की तलाश की जाएगी।

राजस्थान के खान एवं पेट्रोलियम विभाग के मुख्य सचिव टी. रविकांत ने जयपुर में आयोजित बिजनेस समिट में बताया कि अब प्रदेश के खनिज डम्प्स में छुपे बहुमूल्य और क्रिटिकल खनिजों की खोज की जाएगी। इसके लिए रिसाइक्लिंग तकनीक का उपयोग कर डम्प्स में उपलब्ध खनिज संपदा को व्यावसायिक रूप से दोहन करने की योजना है।

Aug 29, 2025 - 15:01
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खान विभाग के मुख्य सचिव टी रविकांत ने कहा—खनिज के ढेरों में से बहुमूल्य और क्रिटिकल खनिजों की तलाश की जाएगी।
T Ravikant

राजस्थान में अब खनिज डम्प्स और अपशिष्ट ढेरों में छिपी बेशकीमती तथा क्रिटिकल खनिज संपदा को खोजकर व्यावसायिक उत्पादन में लाया जाएगा। जयपुर में आयोजित राजस्थान बिजनेस समिट—माइन्स एंड पेट्रोलियम सेशन में खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकान्त ने कहा कि विभाग रीसाइक्लिंग और उन्नत प्रोसेसिंग तकनीक अपनाकर “डम्प-टू-वेल्यू” मॉडल पर काम करेगा। इससे राज्य के खनन इकोसिस्टम में नई निवेश संभावनाएं और रोजगार सृजन का मार्ग खुलेगा।

रविकान्त ने बताया कि IIT हैदराबाद तथा IIT(ISM) धनबाद जैसे अग्रणी संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डम्प्स में मौजूद एसोसिएटेड मिनरल्स के डिपॉजिट्स का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जिसमें एक्सट्रैक्शन, रीसाइक्लिंग, सेपरेशन और वैल्यू-एडिशन की तकनीकों को परखा जाएगा। देश में क्रिटिकल मेटल्स के क्षेत्र में IIT(ISM) धनबाद का नेतृत्व और राष्ट्रीय स्तर पर चल रही पहलों से समन्वय भी किया जाएगा।

खान विभाग एआई, ड्रोन-आधारित सर्वे, जियो-केमिकल और जियो-फिजिकल मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अन्वेषण में अपनाने पर जोर दे रहा है। इससे डम्प्स में छिपी रेयर अर्थ एलिमेंट्स और अन्य क्रिटिकल खनिजों की पहचान तेज और पारदर्शी तरीके से संभव होगी। उद्योग मंचों पर भी राजस्थान की इस पहल को एनेर्जी सिक्योरिटी और सस्टेनेबल माइनिंग के एजेंडा से जोड़ा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, रेयर अर्थ्स) की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में डम्प्स की रीसाइक्लिंग और वैल्यू रिकवरी भारत की सप्लाई-चेन रेजिलिएंस और हरित उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। IIT(ISM) धनबाद में इसी विषय पर राष्ट्रीय स्तर के कॉन्फ्रेंस और R&D नेटवर्क बन रहे हैं, जिनका लाभ प्रदेश को मिलेगा

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