Colonel Sonaram Funeral: राजस्थान ने अपने सपूत को दिया अंतिम सलाम – कर्नल सोनाराम को सैन्य सम्मान के साथ विदाई
कर्नल सोनाराम चौधरी, राजस्थान के पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता का निधन हो गया। उनके निधन से राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कर्नल चौधरी की श्रद्धांजलि उनके पैतृक गांव मोहनगढ़, जैसलमेर में सैन्य एवं राजकीय सम्मान के साथ दी गई।
जैसलमेर के मोहनगढ़ में शुक्रवार का दिन भावुक कर देने वाला रहा। पूर्व सांसद और सेना से कर्नल रहे सोनाराम चौधरी को सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गुरुवार रात जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक घर पहुंचा, तो लोग उमड़ पड़े। पूरे कस्बे ने बाजार बंद रखकर अपनी श्रद्धांजलि दी।
मोहनगढ़ में भीड़ का सैलाब
गुरुवार रात से ही उनके घर के बाहर लोगों की कतारें लगी रहीं। आस-पास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। सेवादल के कार्यकर्ताओं ने तिरंगे से पार्थिव देह को ढककर सलामी दी। हर किसी की आंखें नम थीं—बातें कम, भावनाएं ज्यादा थीं।
कौन-कौन पहुंचे श्रद्धांजलि देने
कई बड़े नेता मोहनगढ़ पहुंचे और अंतिम दर्शन किए। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, मंत्री केके विश्नोई, विधायक हरीश चौधरी, शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, विधायक आदूराम मेघवाल, प्रियंका चौधरी, रूपाराम सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने कर्नल साहब के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
अंतिम यात्रा—जनसमर्थन का नज़ारा
शुक्रवार सुबह 11 बजे उनके पैतृक निवास से अंतिम यात्रा निकली। सड़क के दोनों तरफ लोग खड़े होकर फूल बरसाते रहे। यह किसी नेता की रूटीन विदाई नहीं थी—यह उस शख्स की विदाई थी जिसने फौज में देश की सेवा की और फिर जनता की आवाज बनकर संसद तक पहुंचा।
सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया गया। सैनिक दस्ते की मौजूदगी, सलामी, और तिरंगे में लिपटी देह—हर दृश्य ने लोगों को गर्व और गम, दोनों से भर दिया। पूरे मोहनगढ़ में सन्नाटा और सम्मान का अद्भुत मिश्रण दिखाई दिया।
दिल्ली में बिगड़ी तबीयत—अस्पताल में दम तोड़ा
कर्नल साहब दिल्ली एक बैठक के लिए गए थे। वहां रात को सीने में दर्द हुआ और अस्पताल ले जाया गया। ऑपरेशन भी हुआ और कुछ देर के लिए हालात सुधरे—उन्होंने बेटे डॉ. रमन से बात भी की। लेकिन देर रात करीब 11:15 बजे स्थिति अचानक बिगड़ी और उनका निधन हो गया। यह खबर जैसे ही अपने इलाके तक पहुंची, सबके दिल बैठ गए।
देह का सफर: दिल्ली से बाड़मेर, फिर मोहनगढ़
गुरुवार दोपहर उनकी पार्थिव देह उत्तरलाई एयरबेस पहुंची। वहां से बाड़मेर स्थित उनके निवास पर ले जाया गया। बाड़मेर में भी जनप्रतिनिधियों और लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। शाम को सड़क मार्ग से मोहनगढ़ लाया गया, जहां जनसैलाब ने देर रात तक अंतिम दर्शन किए।
लोग क्यों इतना मानते थे कर्नल साहब को
कर्नल सोनाराम सिर्फ नेता नहीं थे—वे फौजी भी थे, खेत-खलिहान की मिट्टी से जुड़ा मन भी। किसानों की बात हो, सीमांत इलाकों की दिक्कतें हों या युवाओं के मौके—वे आगे रहकर आवाज उठाते थे। सादगी, बेबाकी और साफ सियासत—यही उनकी पहचान थी।
परिवार और अंतिम संदेश
परिवार में उनकी पत्नी विमला चौधरी और बेटा डॉ. रमन हैं। बेटे के साथ आखिरी बातचीत की खबर सुनकर लोग भावुक हो उठे। सबका कहना था—“कर्नल साहब चले गए, लेकिन उनका काम और नाम हमेशा याद रहेगा।”
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