"यमुना जल समझौते से बुझेगी राजस्थान की प्यास", CM भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर तीखा हमला- 'इन्होंने कभी समाधान नहीं निकाला'
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऐतिहासिक यमुना जल समझौते को राज्य के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट से वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहे शेखावाटी और अन्य क्षेत्रों की प्यास बुझेगी।
जयपुर। राजस्थान और हरियाणा के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक यमुना जल समझौते (Yamuna Water Agreement) के बाद प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते को मरुधरा के लिए एक बड़ी जीत और जीवनदायिनी योजना करार दिया है। इस बड़ी प्रशासनिक कामयाबी के बीच सीएम भजनलाल ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया और जल संकट को लेकर उनकी पिछली नीतियों की जमकर आलोचना की।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां कांग्रेस ने इस मुद्दे को दशकों तक उलझाए रखा, वहीं वर्तमान भाजपा सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए इसका स्थायी समाधान निकाला है।
"डबल इंजन की सरकार ने पूरा किया वादा"
मीडिया और जनसभाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान के कई जिले विशेषकर चूरू, झुंझुनू और सीकर (शेखावाटी क्षेत्र) लंबे समय से शुद्ध पेयजल और सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे थे।
सीएम भजनलाल का बयान:
"हमने चुनावों के दौरान जनता से वादा किया था कि हम पीने के पानी की समस्या का स्थायी समाधान करेंगे। आज यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि डबल इंजन की सरकार जो कहती है, वो करती है। इस अंडरग्राउंड पाइपलाइन प्रोजेक्ट से हमारे राजस्थान के प्यासे खेतों और कंठों की प्यास बुझेगी।"
कांग्रेस पर साधा तीखा निशाना
अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाने के साथ ही सीएम शर्मा ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार और कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला।
केवल अटकाने का काम: मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1994 में जल बंटवारे के मूल समझौते के बावजूद कांग्रेस की सरकारों ने कभी इस दिशा में गंभीरता से काम नहीं किया। "उन्होंने केवल फाइलों को अटकाने और जनता को गुमराह करने का काम किया।"
इच्छाशक्ति की कमी: सीएम ने कहा कि कांग्रेस के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। अगर वे चाहते तो हरियाणा के साथ बैठकर इस विवाद को बहुत पहले सुलझा सकते थे, लेकिन उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर कभी समाधान नहीं निकाला और वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी।
शेखावाटी अंचल के लिए नई उम्मीद
इस समझौते के तहत हरियाणा के ताजेवाला हेडवर्क्स से 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान को उसके हिस्से का पानी मिलेगा।
यह पानी सीधे तौर पर उन इलाकों को 'डार्क जोन' से बाहर निकालेगा, जहां ग्राउंड वाटर या तो खत्म हो चुका है या पूरी तरह खारा है।
सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरते ही कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और लाखों परिवारों को शुद्ध पेयजल नसीब होगा।
सीएम भजनलाल के इस बयान के बाद अब राजस्थान की राजनीति में श्रेय लेने की होड़ और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां भाजपा इसे अपने सुशासन का बड़ा उदाहरण बता रही है, वहीं कांग्रेस को अब इन आरोपों का बचाव करना पड़ रहा है।
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