इसरो 14 फरवरी को करेगा लॉन्च मिशन की शुरुआत, पीएसएलवी-सी52 ले जाएगा 1710 किलो वजनी ईओएस-04 उपग्रह

इसरो ने पीएसएलवी-सी52 उपग्रह लॉन्चिंग के अलावा एक और अच्छी ख़बर बताई है कि इनसेट-4बी उपग्रह को कुछ दिनों पहले 24 जनवरी से अब डिस्पोज किया जा रहा है, क्योंकि इनसेट-4बी उपग्रह ने अंतरिक्ष में अपना समय पूरा कर लिया है।

February 13, 2022 - 19:00
February 28, 2022 - 20:24
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इसरो 14 फरवरी को करेगा लॉन्च मिशन की शुरुआत, पीएसएलवी-सी52 ले जाएगा 1710 किलो वजनी ईओएस-04 उपग्रह
पीएसएलवी-सी52- फोटो:gettyimages

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अर्थात इसरो (ISRO) इस साल 2022 का अपना पहला अभियान 14 फरवरी को शुरू करेगा। पीएसएलवी-सी52 के जरिए पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह ईओएस-04 को सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा। बेंगलुरु में स्थित इसरो मुख्यालय की तरफ से बताया गया कि सोमवार (14फरवरी) को सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम ‘लांच पैड’ से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी सी52) को लॉन्च किया जाएगा।

Indian Space Research Organisation (इसरो) की तरफ से कहा गया है कि पीएसएलवी-सी52 ध्रुवीय उपग्रह को ईओएस-04 उपग्रह जो करीब 1,710 किलोग्राम भारी है, इसे सूर्य की समकालिक ध्रुवीय कक्षा में 529 किलोमीटर पर स्थापित करने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा पीएसएलवी- सी52 के लॉन्च अभियान के जरिए दो और छोटे-छोटे उपग्रहों को स्थापित किया जाएगा। 

कोरोना वायरस के कारण हुई लॉन्चिंग में देरी

इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी-सी52 ध्रुवीय उपग्रह को पिछले साल जुलाई माह में लॉन्च किया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से लॉन्चिंग में लगातार देरी होती रही। 1,710 किलोग्राम वजनी ईओएस-04 सैटेलाइट को 14 फरवरी, 2022 की सुबह 5 बजकर 59 मिनट पर लॉन्च करने की सम्भावना है।

ईओएस-04 सैटेलाइट की खासियत

इसरो के अनुसार, EOS-04 एक राडार इमेजिंग सैटेलाइट (उपग्रह) है। इसका डिजाइन हर प्रकार के मौसम में उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भेजने के लिए बनाया गया है, और इस सैटेलाइट का उपयोग खेती, जंगल, पौधरोपण, मिट्टी में नमी, पानी की उपलब्धता, बाढ़ से प्रभावित इलाकों के नक्शे बनाने और देश की सुरक्षा आदि कार्यों में कर सकते हैं।

ये दो उपग्रह भी साथ जाएंगे अंतरिक्ष

इंस्पायर सेट-1: यह सैटेलाइट भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान तकनीक संस्थान ने कोलोराडो विश्विद्यालय के अंतरिक्ष भौतिक शास्त्र व वायुमंडलीय प्रयोगशाला के साथ मिलकर बनाया है।
आईएनएस-2टीडी : यह दूसरा सैटेलाइट इसरो का ही बनाया हुआ है। इस उपग्रह को भारत व भूटान के संयुक्त उपग्रह आईएनएस-2वी से पहले विकसित कर अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है।

इनसेट-4बी उपग्रह बना देश का 21वां डी-कमीशन उपग्रह

इसरो ने पीएसएलवी-सी52 उपग्रह लॉन्चिंग के अलावा एक और अच्छी ख़बर बताई है कि इनसेट-4बी उपग्रह को कुछ दिनों पहले 24 जनवरी से अब डिस्पोज किया जा रहा है, क्योंकि इनसेट-4बी उपग्रह ने अंतरिक्ष में अपना समय पूरा कर लिया है। यह 21वां उपग्रह है, जिसे इसरो पीएमडी (डिस्पोज) कर रहा है। करीब 1,335 किलोग्राम वजनी इनसेट-4बी को 11 मार्च, 2007 के दिन 12 सालों के लिए अंतरिक्ष में काम करने के लिए भेजा गया था। संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष मलबा नियंत्रण गाइडलाइन के अनुसार इनसेट-4बी उपग्रह को डिस्पोज करने के लिए 340 किमी ऊंचाई के परिक्रमा पथ ‘ग्रेवयार्ड-आर्बिट’ में भेजा गया है।

मार्च और अप्रैल में भी लॉन्च किए जाएंगे कुछ सैटेलाइट

इस लॉन्च मिशन के बाद इसरो मार्च में OCEANSAT-3 और INS-2B, ANAND लॉन्च कर सकता है। इसके अलावा अप्रैल महीने में भी इसरो स्मॉल सैटेलाइट को व्हीकल (SSLV) की मदद से एक माइक्रो सैटेलाइट लॉन्च किया जाएगा। इस साल 2022 की पहली तिमाही में कम्युनिकेशन सैटेलाइट GSAT-24 की लॉन्चिंग भी हो सकती है।

जनवरी में ही एस. सोमनाथ बने इसरो के नए चीफ

साल 2022 के शुरुआत में ही 14 जनवरी के दिन रॉकेट वैज्ञानिक एस. सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नया चैयरमेन बनाया गया था। इसके पहले वरिष्ठ वैज्ञानिक के. सिवन 2018 से इसरो के चैयरमेन थे। एस. सोमनाथ ने GSLV Mk-3 और PSLV K-11 सैटेलाइट लॉन्चर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।‌ 

इसरो का नया चैयरमेन बनने के बाद एस. सोमनाथ ने क्या कहां?

इसरो के नए प्रमुख एस. सोमनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्तमान में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल इसरो तक ही सीमित है, लेकिन अब केन्द्र सरकार चाहती है कि इस क्षेत्र में भी नए लोग आएं और इसरो के साथ मिलकर काम करें। सोमनाथ ने मौजूदा अंतरिक्ष बजट 15,000-16,000 करोड़ रुपये को बढ़ाकर अब 20,000-50,000 करोड़ रुपये से अधिक किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा एस. सोमनाथ ने कहां कि, अंतरिक्ष बजट में वृद्धि केवल सरकारी धन या समर्थन से नहीं हो सकती है। इसके साथ इसरो को निजी कंपनियों के लिए व्यापार के अवसर प्रदान करने के वास्ते विकसित करने की जरूरत है।

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