लोकसभा ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 पारित किया
जालंधर के डॉ. बी. आर. आंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधान एवं परामर्श विभाग के डीन डॉ. रोहित मेहरा ने ऑनलाइन गेमिंग विनियमन के लिए सरकार के इस बिल का स्वागत किया है।
Delhi, August 21 —
लोकसभा ने बुधवार को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है, जिससे ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में स्पष्ट नियम और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
जालंधर के डॉ. बी. आर. आंबेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधान एवं परामर्श विभाग के डीन डॉ. रोहित मेहरा ने इस विधेयक के पारित होने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस नियम का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसी हानिकारक मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगाना है, जिससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा हो।
डॉ. मेहरा ने यह भी बताया कि विधेयक युवाओं को सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स के क्षेत्र में नए कौशल सीखने और प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे न केवल मनोरंजन का बेहतर स्तर आएगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृज़ित होंगे।
यह विधेयक ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित और संवर्धित करने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है, जो देश में डिजिटल गेमिंग उद्योग के विकास में मदद करेगी।
ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 में क्या है?
इस बिल के मुख्य प्रावधान:
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ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह प्रतिबंध:
इसमें ऑनलाइन पैसे के साथ खेले जाने वाले सभी गेम (चाहे वो स्किल पर आधारित हों या किस्मत पर) बैन कर दिए गए हैं। कोई भी कंपनी, व्यक्ति या संस्था ऐसे गेम्स ऑफर, प्रचार या चलाने की अनुमति नहीं होगी। इन गेम्स में पैसे, वर्चुअल करेंसी, टोकन आदि लगाना या जीतना निषेध है। -
ऐड और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन भी बैन:
ऐसे मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन या प्रचार पर भी पाबंदी रहेगी। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को ऐसे गेम के पेमेंट प्रोसेस करने से साफ मना है। -
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी बनेगी:
ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक राष्ट्रीय रेगुलेटरी अथॉरिटी बनेगी, जो गेम्स की कैटेगरी तय करेगी, लाइसेंसिंग की निगरानी करेगी, शिकायतें सुनेगी और नियम बनाएगी। -
ई-स्पोर्ट्स और सोशल/एजुकेशनल गेम्स को प्रोत्साहन:
ई-स्पोर्ट्स (competitive skill games) व सोशल/एजुकेशनल गेम्स (जिनमें पैसे का लेन-देन नहीं) को सरकारी मान्यता और सुविधाएं दी जाएंगी। मिनिस्ट्री ऑफ स्पोर्ट्स इसके लिए प्रशिक्षण, कैंपस व जागरूकता कार्यक्रम शुरू करेगी। -
कड़े दंड का भी प्रावधान:
कानून तोड़ने पर 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। प्रमोटर्स/विज्ञापनदाताओं को भी 2 साल की सज़ा या 50 लाख रुपये तक का फाइन देना पड़ सकता है। कंपनी डायरेक्टर/मैनेजर भी जिम्मेदार होंगे। -
केंद्र सरकार की निगरानी:
सरकार को अधिकार होगा कि वह ऐसे नेटवर्क, वेबसाइट, ऐप और उनके कंटेंट को तुरंत ब्लॉक या हटा सके। -
भारत के बाहर संचालित, मगर भारत में उपलब्ध गेम भी आएंगे दायरे में:
बिल के अनुसार, भारत की जनता को उपलब्ध कोई भी ऑनलाइन गेमिंग सेवा—चाहे वह देश के अंदर या बाहर से ऑपरेट हो—इस कानून के तहत कवर होगी। -
मूल उद्देश्य:
समाज में जुए/सट्टेबाज़ी की लत और आर्थिक-मानसिक नुकसान रोकना, परिवारों को बचाना और युवाओं को स्वस्थ डिजिटल एंटरटेनमेंट की ओर प्रेरित करना.
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