राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर, 2025 से जयपुर में शुरू हुआ है। इस सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा टकराव और जोरदार बहस की पूरी संभावना है। भाजपा ने इस सत्र को लेकर अपनी रणनीति पहले ही तैयार कर ली है, जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियाँ कई जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने को तैयार हैं।
सत्ता की तैयारी
• भाजपा ने विधायक दल की बैठक कर के सदन में विपक्ष के हर हमले का मुकाबले की रणनीति तैयार की है।
• मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल की अगुवाई में सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले और जरूरी विधेयक पारित हो सकें।
• सत्र के शुरुआती दिन साधारण कार्यवाही रखी गई, जिसमें पिछले सत्र में पारित विधेयकों, अध्यादेशों और प्रवर समिति की रिपोर्ट पेश की गई।
विपक्ष की रणनीति
• कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया, जिससे साफ है कि वह सदन में सरकार के विरुद्ध मुखर भूमिका निभाएगी।
• विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, बाढ़ राहत, स्कूली बच्चों की मौत, एसआई भर्ती परीक्षा, महिला सुरक्षा, खाद की कमी, बेरोजगारी, किसान संकट आदि मुद्दों को उठाने का फैसला किया है।
• कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में सत्र खत्म करना चाहती है, जबकि विपक्ष सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुद्दे और विधेयक
• सरकार की ओर से भूजल, कोचिंग, रिम्स, महिलाओं को कारखानों में रात को काम करने की छूट, मत्स्य अपराध, धर्मांतरण विरोधी बिल आदि विधेयक पेश करने की योजना है।
• धर्मांतरण विरोधी बिल को लेकर हंगामे की आशंका जताई जा रही है।
• पिछले सत्र में प्रवर समिति को भेजे गए तीन विधेयकों को इस सत्र में दोबारा पेश किया जाएगा।
माहौल और संभावना
• पूर्वानुमान यही है कि इस सत्र में सत्ता-विपक्ष के बीच जोरदार टकराव रहेगा, जिसमें नारेबाजी, कुएँ में उतरना और धरना-प्रदर्शन भी हो सकता है।
• सरकार चाहती है कि सार्थक बहस हो, लेकिन विपक्ष का कहना है कि वह हर मुद्दे पर सरकार को घेरने को तैयार है।