राजस्थान में शिक्षा विभाग में तबादलों का विवाद: बैन के बावजूद चल रहा बैकडोर से तबादलों का सिलसिला
शिक्षक संघों ने सवाल उठाया है कि विभाग किस आधार पर ये सूची बना रहा है, किसकी सिफारिश पर तबादले किए जा रहे हैं और क्या शिक्षकों से तबादले के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
राजस्थान में शिक्षा विभाग में तबादलों पर तो प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन विभाग के अंदर गुपचुप तरीके से बड़े पैमाने पर तबादलों का सिलसिला जारी है। हाल ही जारी सूची में 500 प्राचार्यों का तबादला किया गया है और अब फिर से प्राचार्य एवं व्याख्याताओं की नई तबादला सूचियां तैयार की जा रही हैं। शिक्षक संगठनों ने इसे बैन की अवहेलना बताते हुए तीखा विरोध किया है और कहा है कि विभाग बिना किसी पारदर्शी नीति के मनमानी से तबादले कर रहा है।
प्रदेश में करीब 3.5 लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक हैं, जिनमें से ज्यादातर पिछले कई सालों से तबादले की मांग कर रहे हैं। पिछली बार 2018 में तबादलों की प्रक्रिया भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। तब से शिक्षकों की मांग अनसुनी पड़ी है, जबकि कुछ खास लोगों को उच्च स्तर की अनुमति लेकर मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है।
कई शिक्षक संघों ने सवाल उठाया है कि विभाग किस आधार पर ये सूची बना रहा है, किसकी सिफारिश पर तबादले किए जा रहे हैं और क्या शिक्षकों से तबादले के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इस तरह के मनमाने तबादले शिक्षक वर्ग में असंतोष मचा रहे हैं।
एक विवादित प्रतिनियुक्ति आदेश में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खेड़, बालोतरा की ज्योत्सना शर्मा को राज्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग में प्रतिनियुक्ति किए जाने पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जबकि विभाग ने प्रतिनियुक्ति आदेशों पर रोक लगाई है।
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