Rajasthan News: UGC रेगुलेशन के समर्थन में एकजुट हुए छात्र संगठन, 'रोहित एक्ट' लागू करने की मांग पर आंदोलन
राजस्थान में NSUI, SFI और अन्य छात्र संगठनों ने 'ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी' के तहत UGC रेगुलेशन के समर्थन में आंदोलन का ऐलान किया है। आज (13 फरवरी) से राज्यव्यापी मार्च शुरू हो रहा है। छात्रों की मुख्य मांग संसद से 'रोहित एक्ट' पास कराने की है, ताकि शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव खत्म हो सके।
जयपुर। राजस्थान में छात्र राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश के प्रमुख छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर 'ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी' के बैनर तले एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। जयपुर में हुई एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन संगठनों ने यूजीसी (UGC) के नए रेगुलेशन का समर्थन किया है और केंद्र सरकार से सख्त 'रोहित एक्ट' (Rohit Act) लागू करने की मांग की है।
इस मुहिम में एनएसयूआई (NSUI), एसएफआई (SFI), आइसा (AISA) और ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति समेत कई संगठन एक साथ आ गए हैं। इनका कहना है कि शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए सिर्फ बातें नहीं, बल्कि ठोस कानून चाहिए।
आज से सड़कों पर उतरेंगे छात्र प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया गया कि आज, यानी 13 फरवरी 2026 को राज्य भर में मार्च निकाला जाएगा और सभाएं की जाएंगी। छात्र नेताओं ने बताया कि यह लड़ाई सिर्फ आज तक सीमित नहीं रहेगी। 15 फरवरी से 22 फरवरी तक पूरे राजस्थान के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और ब्लॉक स्तर पर पर्चा वितरण अभियान चलाया जाएगा ताकि आम छात्रों को इस मुद्दे से जोड़ा जा सके।
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सरकार और कोर्ट पर उठाए सवाल वक्ताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब भी बहुजन और वंचित समाज के हक में कोई सकारात्मक कानून या रेगुलेशन आता है, तो उसे कोर्ट-कचहरी के जरिए रुकवा दिया जाता है। वहीं, ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण जैसे फैसलों को तुरंत मंजूरी मिल जाती है। छात्र नेताओं ने इसे वंचितों के साथ अन्याय बताया और कहा कि वे अब चुप नहीं बैठेंगे।
कौन-कौन हुआ शामिल? इस प्रेस वार्ता में ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति के राजेंद्र चौधरी, स्वतंत्र पत्रकार महेश चौधरी, जेएनयू की पूर्व प्रत्याशी सलोनी खंडेलवाल, एनएसयूआई के किशोर चौधरी, एआईओबीसीएसए (AIOBCSA) से रामसिंह सामोता और एसएफआई के डॉ. अश्विनी वर्मा समेत कई दिग्गज मौजूद रहे।
सभी ने एक सुर में कहा कि यूजीसी के 'सामाजिक समता विनियमों' (Social Equity Regulations) को और मजबूती से लागू करना होगा। उनका साफ कहना है कि जब तक संसद से 'रोहित एक्ट' पास नहीं होता, ताकि कैंपस में किसी छात्र के साथ जाति के आधार पर भेदभाव न हो, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
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