राजस्थान: ‘वनवास’ का जिक्र कर वसुंधरा राजे ने छेड़ी सियासी चिंगारी, हलकों में बहस तेज

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राम कथा के दौरान दिए अपने भाषण में ‘वनवास’ का जिक्र कर राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया।

Aug 29, 2025 - 14:05
Aug 29, 2025 - 14:55
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राजस्थान: ‘वनवास’ का जिक्र कर वसुंधरा राजे ने छेड़ी सियासी चिंगारी, हलकों में बहस तेज
Vasundhara Raje

धौलपुर (राजस्थान), 28 अगस्त।राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार शाम धौलपुर में चल रही रामकथा में शामिल होकर अपने संबोधन से सियासी सनसनी पैदा कर दी। कथा के बाद लोगों के साथ बढ़ते सौजन्यवश रहे उनके शब्दों में ‘वनवास’ का जिक्र और कहा, “दुनिया में कोई चीज स्थायी नहीं है। अगर आई है तो जाएगी भी… वनवास अगर आता है तो जाता भी है”—यह बयान हालात के पलड़े से जुड़कर राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा गया है।

किसके लिए ‘वनवास’?

सियासी गलियारों में हर कोई वसुंधरा के इस बयान का समीकरण प्रदेश बीजेपी के भीतर उनकी बढ़ती दूरी और मौजूदा सरकार में उनकी कमतर भूमिका से जोड़ रहा है। राजे ने कहा, “आजकल की दुनिया बड़ी अजीब है, जिसको अपना समझा, वो पराया भी हो जाता है… ऐसे समय में परिवार की बहू, मां, बेटी को भी अपना-अपना काम करना पड़ता है।” इसी कड़ी में उन्होंने धैर्य बनाए रखने की सीख दी, लेकिन यह सियासी हलकों में एक ‘रिफ्लेक्शन ऑफ हर लाइफ’ से कहीं ज्यादा निकला।

जहां राजे के दौरे को निजी कार्यक्रम बताया गया, वहीं अचानक रामकथा में शामिल होना, कार्यकर्ताओं से गर्मजोशी से मिलना, और फिर ‘वनवास’ जैसा बयान—यह सब एक पर्सनल वॉयस नहीं, बल्कि सियासी पटल को लेकर एक स्पष्ट सिग्नल माना जा रहा है। राजे की सेफ्टी जोन से बाहर ‘वनवास’ की बात करना, विपक्ष में रहने की तकलीफ बयां करना, और सियासी बदलाव का इंतजार करने की मानसिकता—यह सब उनकी राजनीतिक उम्मीदों का संकेत है।

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