पंघाल के पंच से निकलेगा स्वर्ण

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समित द्वारा जारी की गई रैंकिंग में पंघाल ने अपनी कैटेगरी में पहली रैंक हासिल की है। वह ओलंपिक जाने वाले भारत के पहले बॉक्सर हैं जिनकी अपनी कैटेगरी में नंबर 1 रैंक है.

July 22, 2021 - 17:04
December 9, 2021 - 10:04
 0
पंघाल के पंच से निकलेगा स्वर्ण
अमित पंघाल

पंघाल के पंच से निकलेगा स्वर्ण

देश के जाने-माने मुक्केबाज अमित पंघाल  टोक्यो ओलंपिक में जब रिंग में उतरेंगे तो उस समय पुरुषों के 52 किग्रा कैटेगरी में उनकी पहली रैंक होगी। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समित द्वारा जारी की गई रैंकिंग में पंघाल ने अपनी कैटेगरी में पहली रैंक हासिल की है। वह ओलंपिक जाने वाले भारत के पहले बॉक्सर हैं जिनकी अपनी कैटेगरी में नंबर 1 रैंक है. अमित को उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज शाखोबिदिन जोइरोव से 2019 विश्व चैंपियनशिप फाइनल और 2021 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हार मिली थी. टोक्यो की तैयारी के लिए इटली जाने से पहले अमित ने कहा कि अब हमारे बीच से कौन बेहतर लड़ता है, वह फर्क खत्म हो चुका है. मुझे पूरा विश्वास है मैं टोक्यो में उसे हार का जख्म दूंगा. टोक्यो में किसी राउंड का मुकाबला आसान नहीं होगा. हरियाणा के रोहतक में जन्में अमित ने विश्व मंच पर अपने मुक्के की धमक से इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करा लिया. अमित ने सबसे पहले 2018 के एशियन गेम्स में अपना डंका बजाया. बैंकॉक में, फाइनल मुकाबले में अमित ने रियो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट उजबेकिस्तान के हसनबॉय दुश्मातोव को हरा स्वर्ण पदक हासिल किया. भारत को विश्व चैंपियनशिप में कभी कांस्य पदक से ज्यादा हासिल नहीं हुआ था. अमित ने फाइनल में पहुंचने के साथ ही इस इतिहास को बदल दिया. अमित से पहले भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह (2009), विकास कृष्ण (2011), शिव थापा (2015) और गौरव बिधुड़ी (2017) ने कांस्य पदक हासिल किया था.

‘किसान का बेटा फर्ज निभाता है’

पिछले साल मार्च 2020 में, जॉर्डन के अम्मान में मुक्केबाजी ओलंपिक क्वालीफायर के मुकाबले हुए. क्वार्टरफाइनल मुकाबले में अमित ने फिलीपींस के मुक्केबाज कार्लो पालम को 4-1 से हराकर ओलंपिक का टिकट पक्का किया था. लेकिन इस बीच जब कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन घोषित किया गया तो वह गांव आ गए और परिवार की खेती कार्यों में मदद करने लगे. इस दौरान अमित ने गेहूं की कटाई से लेकर ढुलाई और संग्रहण तक में परिवार की मदद की. उनके इस सराहनीय काम के लिए हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने ट्वीट करके उनकी तारीफ भी की. दुष्यंत ने अमित के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, “खेतों में पिता का हाथ बंटाता है, खेलों में देश की शान बढ़ाता है, देश की रक्षा में जान गंवाता है, किसान का बेटा फर्ज निभाता है.” अमित बिना किसी झिझक के कहते हैं वो एक किसान परिवार से हैं और जब उस वक्त वह बाहर नहीं जा सकते थे, तो उन्हें घर के काम में हांथ बंटाना ही था. हालांकि, गेहूं तो कंबाइन मशीन से काटे गए लेकिन, ट्रॉली से गेहूं को उतारने के लिए अमित खुद जुट गए थे.

कभी रिंग के लिए भी तरसे, लेकिन जिद ने बनाया चैंपियन

अमित एक सामान्य सी कद काठी वाले बाक्सर हैं. साल 2011-12 की बात है, जब हरियाणा शिक्षा बोर्ड में डीईपी पद पर तैनात पूर्व अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज और अमित के गुरु अनिल धनखड़ का तबदला रोहतक से गुरुग्राम हो गया. उस समय गुरुग्राम खेल विभाग के पास मुक्केबाजी रिंग नहीं होने के कारण उन्होंने यहां कोचिंग का काम बंद कर दिया. अपने गुरु के पीछे- पीछे अमित भी रोहतक को छोड़ गुरुग्राम आ गए. कोच के मना करने के बाद भी अमित रोहतक नहीं लौटे. आखिरकार, शिष्य की जिद के आगे गुरु को मजबूर होना पड़ा और अनिल धनखड़ कोचिंग देने के लिए राजी हो गए. उसके बाद बिना रिंग के ही ट्रेनिंग चलती रही. धनखड़ बताते हैं कि अमित में वह सब कुछ मौजूद था, जो एक चैंपियन के लिए जरूरी होता है. गुरुग्राम में सुविधा नहीं होने की वजह से वह चाहते थे कि अमित रोहतक में ही ट्रेनिंग ले. लेकिन अमित ने उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह रिंग के बिना ट्रेनिंग ले रहा है. अमित कहते हैं कि यह गुरु अनिल धनखड़ ही थे, जिन्होंने एशियाई खेल और ओलंपिक का लक्ष्य बनाकर ट्रेनिंग शुरू करवाई थी. जब गुरुजी कहते थे कि 2018 एशियाई खेल और टोक्यो ओलंपिक में खेलना है तो मैं सोचता था कि यह कैसे संभव होगा ? जब 2015 के 35वें राष्ट्रीय खेलों में देश के बड़े मुक्केबाजों ने खेलने से मना किया तो मुझे प्रदेश की तरफ से खेलने का मौका मिला और वहां पर रजत पदक जीतकर लाया. तब लगा कि देश का नाम रोशन करने के काबिल हूं. अमित आगे बताते हैं कि उन्होंने उसके बाद पीछे पलट कर नहीं देखा. साल 2017 में जिले के कुछ लोगों के प्रयास से मुझे रिंग मिली और एक साल रिंग में प्रैक्टिस करने का मौका मिला, जिसके बलबूते 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत सका.

एक झलक अमित के पदकों पर –

2017- एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक

2018- एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक

2018- कामनवेल्थ खेलों में रजत पदक

2019- विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक

2019- एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक

2021- एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक