Positive News: जानिए मोतियों की खेती कर लखपति बने नीतिल और संजय का लखपति बनने का सफर कैसा रहा ?

परंपरागत खेती को छोड़कर देश के युवा नई विधाओं में हाथ आजमा रहे हैं। जिनमें से कुछ युवा लखपति बनने का सफर भी तय कर चुके हैं। आईए जानते हैं ऐसे ही दो युवाओं की यात्रा के बारे में:-

May 17, 2022 - 03:25
May 17, 2022 - 03:27
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Positive News: जानिए मोतियों की खेती कर लखपति बने नीतिल और  संजय का लखपति बनने का सफर कैसा रहा ?
मोतियों की खेती कर लखपति बने नीतिल और संजय

आज तक हमने खेती की बहुत सी विधाएं देखी हैं और कुछ नई विधाएं भी हम रोजमर्रा की जिंदगी में देखते रहते हैं। हालांकि वर्तमान में बढ़ती महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आज किसान जितनी लागत अपनी फसल तैयार करने में लगाता है, उतना मुनाफा नहीं हो पाता है। परंतु अब नए दौर के युवाओं ने खेती की परिभाषा को बदल दिया है, जहां मोतियों की खेती कर कम से कम लागत से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। हालांकि सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है क्योंकि कम वक्त में इस खेती द्वारा बेहतर कमाई की जा सकती है। जिसके पीछे की एक प्रमुख वज़ह पिछले कुछ वर्षो में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मोतियों की मांग का बढ़ना भी है। वहीं इस अवसर का लाभ उठाते हुए नितिल और संजय ने मिसाल कायम की है।

1. मल्टीनेशनल कंपनी की जॉब छोड़कर बने किसान

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में रहने वाले नितिल जो दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे, ने अच्छी खासी सैलरी के बावजूद नौकरी छोड़कर मोतियों की खेती में खुद को लगाना चुना। वर्तमान में नितिल मोतियों की खेती कर रहे हैं तथा कई राज्यों एवं देश के हिस्सो में अपने मोतियों की सप्लाई भी कर रहे हैं। नितिल ने एक अखबार में अपना इंटरव्यू देते हुए बताया कि साल 2017 में वह अपने गांव आए तब उन्होंने समाचार पत्रों में मोतियों की खेती के बारे में पढ़ा। जिसके बाद थोड़ी बहुत जानकारी प्राप्त कर कुछ अलग करने की सोच के साथ वे मध्यप्रदेश के होशंगाबाद चले गए। जहां उन्होंने इस खेती की ट्रेनिंग ली। ट्रैनिंग के बाद नितिल ने साल 2019 में नौकरी छोड़ मोतियों की खेती शुरू कर दी तथा सरकार से 50% की सब्सिडी पाकर उन्होंने 1 एकड़ जमीन पर तालाब खुदवाया। शुरुआती दौर में चेन्नई से पांच सौ सीपियां लाकर उन्होंने खेती प्रारंभ की जहां 25 हजार की लागत आई और उन्हें 75 हजार तक का मुनाफा हुआ। जिसके बाद नितिल ने वहीं रुकने की बजाय अगले साल दोगुनी मेहनत के साथ 25 हजार सीपियां तालाब में डाली जहां 15 हजार सीपियां ही सुरक्षित रह पाई। जिसके बाद नितिल ने मोतियों के नए-नए डिजाइन देकर सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी मार्केटिंग शुरू की।

2. सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़कर चुनी खेती 

वहीं दूसरी ओर संजय गंडाते ने भी सरकारी नौकरी की तैयारी करने पर सफलता प्राप्त नहीं हुई तो मोतियों की खेती प्रारंभ कर दी। संजय महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के रहने वाले हैं और सालाना ₹10 लाख तक का व्यापार करते हैं। संजय के मोतियों की मांग अमेरिका और इटली जैसे देशों में है। बता दें कि संजय 7 वर्षों से मोतियों की खेती कर रहे हैं। संजय बताते हैं कि बचपन से ही उनकी रूचि सीपियां चुनने में थी और वह गांव के पास के नदी में सीपीया चुनने जाते थे। कोई खास जानकारी ना होने के बावजूद भी धीरे-धीरे वे मोतियों के फार्मिंग की ओर आकर्षित होने लगे थे और कई वर्षों तक सरकारी नौकरी में असफलता प्राप्त होने के कारण अंत में संजय ने किराए पर तालाब लेकर मोतियों की खेती प्रारंभ कर दी। संजय बताते हैं कि पारंपरिक खेती में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उन्होंने मोतियों की खेती करने का मन बनाया और पास के कृषि विज्ञान केंद्र जाकर उन्होंने अहम जानकारियां प्राप्त की। जिसके बाद 10 हजार से कम लागत में संजय ने खेती प्रारंभ की जिसमें उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। परंतु शुरुआती दौर में घाटा सहने के बाद भी संजय ने हार नहीं मानी और मोतियों की फार्मिंग जारी रखी। इसी जुझारूपन की वज़ह से आगे चलकर काफी अच्छी संख्या में मोती तैयार हुए और अब नितिन की तरह ही संजय भी मोतियों की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं ।

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