Rajasthan News: “फीस लेते हैं, चुनाव नहीं कराते”: छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर फिर भड़का आंदोलन, अग्रिम पंक्ति में छात्र नेता शुभम रेवाड़

राजस्थान विश्वविद्यालय में लंबे समय से आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में रहे छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने कहा कि “जब तक चुनाव बहाल नहीं होते, संघर्ष तेज होगा,” और बीते दिनों आमरण अनशन पर बैठे तो पुलिस ने उन्हें उठाकर अनशन तुड़वाया था। 

Sep 2, 2025 - 19:54
Sep 2, 2025 - 20:39
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Rajasthan News: “फीस लेते हैं, चुनाव नहीं कराते”: छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर फिर भड़का आंदोलन, अग्रिम पंक्ति में छात्र नेता शुभम रेवाड़
Shubham Rewar
राजस्थान के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव फिर न कराने के संकेतों के बीच छात्र संगठनों ने एलान किया है कि वे फीस और गतिविधियों के नाम पर वसूली होने के बावजूद प्रतिनिधि चुनने के अधिकार से वंचित नहीं रहेंगे और चरणबद्ध आंदोलन जारी रखेंगे। 
इसी मुद्दे पर राजस्थान विश्वविद्यालय में लंबे समय से आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में रहे छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने कहा कि “जब तक चुनाव बहाल नहीं होते, संघर्ष तेज होगा,” और बीते दिनों आमरण अनशन पर बैठे तो पुलिस ने उन्हें उठाकर अनशन तुड़वाया था। 
क्या कहता है छात्र पक्ष
दैनिक भास्कर के अनुसार, छात्र नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन “मौलिक अधिकारों का हनन” कर रहा है और “फीस लेकर भी चुनाव नहीं करा रहा,” इसलिए वे कक्षा से लेकर कैंपस गेट तक चरणबद्ध विरोध करेंगे। 
जयपुर में हुए अनोखे विरोध में छात्रों ने उन नेताओं के कटआउट्स के साथ प्रदर्शन किया जो छात्र राजनीति से उभरे हैं; इसी दौरान शुभम रेवाड़ ने कहा कि छात्रसंघ राजनीति ने राज्य को अनेक जननेता दिए हैं और चुनाव रोकना युवाओं की आवाज दबाने जैसा है। 
शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में 1,500 किमी पदयात्रा की रूपरेखा भी सामने आई, जिसका उद्देश्य प्रदेश की यूनिवर्सिटियों-काॅलेजों में जाकर व्यापक छात्र समर्थन जुटाना और चुनाव बहाली की राज्यव्यापी मांग को मजबूत करना है। 
RU का पक्ष और कानूनी स्थिति
RU ने हाईकोर्ट से कहा है कि छात्रसंघ चुनाव न कराने से किसी मौलिक अधिकार का हनन नहीं होता और याचिका निरस्त की जाए; अदालत ने इस पर जवाब तलब किया है। 
इससे पहले भी RU ने अदालत में कहा था कि चुनाव मौलिक नहीं, नियमाधारित प्रक्रिया हैं; NEP के अमल और सेमेस्टर कैलेंडर के कारण इस शैक्षणिक वर्ष में चुनाव न कराने का तर्क दिया गया है। 
अनशन व पुलिस कार्रवाई
राजस्थान विश्वविद्यालय गेट पर आमरण अनशन पर बैठे शुभम रेवाड़ को पुलिस ने उठाकर अस्पताल ले जाकर अनशन तुड़वाया; इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया। 
रेवाड़ का कहना है कि प्रशासन उनकी “वाजिब मांगों को दबाने” की कोशिश कर रहा है, जबकि वे शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव बहाली की मांग उठा रहे हैं। 
अगला कदम
दैनिक भास्कर के अनुसार, छात्र संगठनों ने चेताया है कि यदि समयबद्ध चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ तो धरना-प्रदर्शन, हंगर स्ट्राइक और पदयात्राएँ जारी रहेंगी। 
अदालत में सुनवाई और विश्वविद्यालयों की लिखित जवाबदेही के साथ, छात्र नेतृत्व ने कहा है कि समाधान तभी संभव है जब चुनाव की तारीखें और निष्पक्ष प्रक्रिया का रोडमैप सार्वजनिक किया जाए। 
कौन हैं शुभम रेवाड़?
शुभम रेवाड़ राजस्थान विश्वविद्यालय के सक्रिय छात्र नेता हैं, जो 2025 में छात्रसंघ चुनाव बहाली आंदोलन के अग्रिम चेहरों में रहे और अपनी सार्वजनिक प्रोफ़ाइल में स्वयं को CA Finalist तथा विश्वविद्यालय का छात्र प्रतिनिधि बताते हैं। RU के मुख्य गेट पर आमरण अनशन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें अस्पताल ले जाकर अनशन तुड़वाया, लेकिन उन्होंने चुनाव बहाली तक संघर्ष जारी रखने की घोषणा की। कैंपस में ‘फीस लेते हो, चुनाव कराओ’ जैसे नारों के साथ उन्होंने कट‑आउट विरोध सहित रचनात्मक प्रदर्शनों का नेतृत्व किया और 1,500 किमी पदयात्रा पहल के जरिए राज्यभर के परिसरों में समर्थन जुटाने का अभियान चलाया।
उनके वक्तव्यों के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र की पहली कड़ी है और फीस बनाम सुविधाएँ, रिवैल्यूएशन/रिज़ल्ट विसंगतियाँ तथा छात्र प्रतिनिधित्व जैसे विश्वविद्यालयी मुद्दों पर निष्पक्ष आवाज उठाना आवश्यक है। उनकी सार्वजनिक प्रोफ़ाइल में नेशनल फ़्रीडम यूनियन (NFU) के राष्ट्रीय सचिव और कोषाध्यक्ष के रूप में पूर्व संबद्धता का स्वयं‑घोषित उल्लेख है, और वे नियमित रूप से सोशल वीडियो/रील्स के माध्यम से कैंपस अपडेट साझा करते हैं।

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