Rajasthan News: आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में बड़ा खुलासा, टीकाराम जूली का दावा- 'एक ही लॉ फर्म के हैं आरोपी और सरकार के वकील'
राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले (15 हजार करोड़ रुपए) को लेकर बड़ा दावा किया है। जूली ने कहा कि मामले में आरोपियों की पैरवी करने वाले और सरकार के वकील एक ही 'लॉ फर्म' के हैं। उन्होंने 22 लाख निवेशकों को न्याय दिलाने के लिए सरकार से इस मामले का संज्ञान लेने, जांच कराने और संबंधित वकील को केस से तुरंत हटाने की मांग की है।
जयपुर। राजस्थान के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक 'आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी' (Adarsh Credit Co-operative Society) के मामले में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने इस मामले में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला दावा किया है। जूली ने आरोप लगाया है कि इस 15 हजार करोड़ रुपए के महाघोटाले में जो वकील आरोपियों की पैरवी कर रहे हैं और जो वकील सरकार की ओर से (यानी पीड़ितों के पक्ष में) लड़ रहे हैं, वे एक ही 'लॉ फर्म' से जुड़े हुए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की भजनलाल सरकार का ध्यान इस गंभीर अनियमितता की ओर खींचते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
22 लाख लोगों की गाढ़ी कमाई, 15 हजार करोड़ का घोटाला
टीकाराम जूली ने बताया कि सिरोही में मुकेश मोदी और उनके परिवार के तकरीबन 60 लोग आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े हुए थे। इस सोसायटी में राजस्थान सहित कई राज्यों के लगभग 22 लाख भोले-भाले लोगों ने अपने जीवन भर की खून-पसीने की कमाई जमा कराई थी। लेकिन प्रमोटर परिवार ने 125 से ज्यादा 'शेल कंपनियां' (Shell Companies) बनाकर 14 से 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम हड़प ली।
जूली की मांग- मामले की जांच हो और वकील को हटाया जाए
जूली ने कहा कि इस मामले में अब तक तकरीबन 200 लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन मामले का एक मुख्य सह-आरोपी सिद्धार्थ चौहान अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर (फरार) है। वहीं, संपत्तियों को अटैच करने और बेचने में भी लिक्विडेटर पर मनमानी करने के आरोप लग रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि पीड़ित पक्ष और आरोपी दोनों की तरफ से एक ही लॉ फर्म द्वारा पैरवी करने वाले वकील का रजिस्ट्रेशन तक निरस्त होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत इस मामले पर संज्ञान (Cognizance) ले, इसकी निष्पक्ष जांच कराए और उस जिम्मेदार वकील को इस केस से तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि 22 लाख निवेशकों को न्याय मिल सके।
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